बलिया ज़िले में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद के एक बयान ने अचानक राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। यह बयान उन्होंने 29 जुलाई को बासडीह में आयोजित एक कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा कि “बलिया के लोग अंग्रेजों के दलाल थे और यहां दलाली की व्यवस्था आज भी चल रही है। इसी कारण यह ज़िला पिछड़ा हुआ है।” मंत्री के इसी कथन को लेकर बलिया में कई संगठनों और स्थानीय लोगों में नाराज़गी फैल गई। विशेष रूप से करणी सेना के जिलाध्यक्ष कमलेश सिंह ने इस बयान पर अत्यंत कड़ा रुख अपनाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा की अगर मेरे सामने मंत्री संजय निषाद आ गए तो राख लगाकर उनकी जुबान खींच लूंगा। अगर नौजवान कोई उनकी जुबान खींचकर लाता है कि उसे 5 लाख 51 हजार का इनाम दूंगा।इसके बाद से पूरे क्षेत्र में इस विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं को नया आयाम दे दिया है।
मंत्री संजय निषाद के बयान पर मचा बवाल
कार्यकर्ता सम्मेलन में मंत्री ने बलिया के इतिहास और वर्तमान परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए यह कहा कि इस ज़िले में ‘दलाली का सिस्टम’ लंबे समय से चला आ रहा है, जिसके कारण विकास बाधित हुआ है। उन्होंने दावा किया कि अंग्रेज़ों के दौर में भी बलिया के कुछ लोग ब्रिटिश शासन का सहयोग करते थे और यही मानसिकता आज भी समाज के कुछ हिस्सों में देखने को मिलती है।
मंत्री के इन शब्दों ने वहां उपस्थित लोगों में भले तत्काल कोई तीखी प्रतिक्रिया ना पैदा की हो, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद विभिन्न संगठनों में आक्रोश देखा गया।
करणी सेना जिलाध्यक्ष का तीव्र विरोध
मंत्री के शब्दों पर सबसे कड़ी प्रतिक्रिया करणी सेना के ज़िला अध्यक्ष कमलेश सिंह की तरफ़ से आई। एक स्थानीय न्यूज़ चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने मंत्री संजय निषाद के बयान को “बलिया के गौरव का अपमान” बताया। कमलेश सिंह ने आरोप लगाया कि जो व्यक्ति अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर टिकटों की दलाली करता है और निषाद समुदाय को गुमराह कर आर्थिक लाभ कमाता है, वही बलिया जैसे ऐतिहासिक जनपद को ‘दलाल’ बता रहा है।
करणी सेना जिलाध्यक्ष ने कहा की अगर नौजवान कोई उनकी जुबान खींचकर लाता है कि उसे 5 लाख 51 हजार का इनाम दूंगा।
उन्होंने कहा कि बलिया हमेशा से अपनी बगावत, स्वाभिमान और देशभक्ति के लिए जाना जाता है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में बलिया ने खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया था, जिसका नेतृत्व चित्तू पांडेय की अगुवाई में हुआ था। इसी बलिया ने मंगल पांडे जैसे क्रांतिकारी और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जैसे बड़े नेताओं को जन्म दिया है। ऐसे जनपद पर दलाली का आरोप लगाना उनके अनुसार “अक्षम्य” है।
इतिहास पर चोट बताकर जताया असंतोष
कमलेश सिंह ने कहा कि बलिया की धरती सदियों से विद्रोह, स्वतंत्रता संघर्ष और बलिदान की प्रतीक रही है। ऐसे क्षेत्र की तुलना दलालों से करना अपमानजनक है। उनका कहना था कि बलिया की महान परंपरा को समझने वाले किसी भी व्यक्ति को इस तरह का बयान देने से पहले सोचना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि बलिया के लोग अपनी स्वाभिमानी प्रकृति के लिए जाने जाते हैं और यहां की जनता ने हर दौर में अन्याय और अपमान के खिलाफ आवाज उठाई है। इसी परंपरा को देखते हुए मंत्री के बयान ने जनपद की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
जनसभा में मौजूद लोगों पर भी सवाल
करणी सेना जिलाध्यक्ष ने न केवल मंत्री के बयान की निंदा की, बल्कि उस सभा में बैठे लोगों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब मंत्री बलिया को ‘दलाल’ बता रहे थे, तब वहाँ मौजूद लोग चुप क्यों बैठे रहे? उन्होंने इसे कायरता करार देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने जनपद का अपमान होने पर चुप नहीं रहना चाहिए था।
उनके अनुसार, उस सभा में मौजूद लोगों को मंत्री के शब्दों का विरोध करना चाहिए था, लेकिन उनकी “खामोशी और तालियां बजाना” स्थिति को और भी खराब दिखाता है।
संजय निषाद पर लगाए व्यक्तिगत आरोप
कमलेश सिंह ने मंत्री संजय निषाद पर व्यक्तिगत स्तर पर भी अनेक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मंत्री ने अपने राजनीतिक करियर में कई बार टिकटों की दलाली की है और उन्हीं पैसों से अपना परिवार खड़ा किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि संजय निषाद ने निषाद समाज को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर अपने बेटे को सांसद बनवाया और स्वयं सत्ता में आए।
उनका कहना था कि मंत्री ने निषाद समुदाय के नाम पर राजनीति तो की, लेकिन उनके हितों की वास्तविक लड़ाई कभी नहीं लड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति खुद टिकट बेचकर राजनीति करता हो, उसे बलिया जैसे जनपद पर दलाली का आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
तीखी भाषा और बयान का विवाद
बात इतनी तक ही सीमित नहीं रही। कमलेश सिंह ने अपने बयान में अत्यंत तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए मंत्री के प्रति आपत्तिजनक बातें कही, जिन्हें लेकर भी विवाद बढ़ गया। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री उनके सामने आ जाएं तो वह उनका कठोर विरोध करेंगे।

