(बलिया), 20 जनवरी 2026 – उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। रोजाना 4 से 7 नए मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन और नगर पालिका की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने से स्थानीय निवासी डर के साये में जी रहे हैं। ताजा घटना आज की है, जहां कड़म चौराहा पर एक आवारा कुत्ते ने 4.5 साल के मासूम बच्चे पर हमला कर दिया, जिससे बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास के लोगों ने कुत्ते को भगाया और बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज हुआ है और स्वस्थ है ।
आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या: बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा खतरा
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इलाके में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए बड़ा खतरा बन गई है। “हर दिन डर लगता है कि कहीं कुत्ता हमला न कर दे। प्रशासन केवल आश्वासन देता है, लेकिन कोई अभियान नहीं चलाता,” एक स्थानीय निवासी ने बताया। बलिया जिले में एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम लागू न होने से समस्या और गंभीर हो गई है, जहां शासन के निर्देशों के बावजूद छह महीने बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई। इसी तरह की घटनाएं पूरे उत्तर प्रदेश में बढ़ रही हैं, जहां सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आवारा कुत्तों के आतंक पर सुनवाई की और राज्यों से ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
- दैनिक मामले: जिले में रोज 4-7 नए डॉग बाइट केस दर्ज हो रहे हैं।
- प्रभावित वर्ग: छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
- कारण: कुत्तों की नसबंदी और पकड़ने के अभियान की कमी, साथ ही सड़कों पर कचरा बढ़ने से कुत्तों की संख्या में वृद्धि।
सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी को सुनवाई में कहा कि कुत्ते इंसानों का डर पहचानते हैं और इसलिए हमला करते हैं, लेकिन राज्यों को इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की जरूरत है। बलिया में भी सरकारी शेल्टर की कमी एक बड़ी समस्या है।
नागरिकों की मांग: तत्काल अभियान और नसबंदी कार्यक्रम
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी कराने और प्रभावित इलाकों में विशेष अभियान चलाया जाए। “यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है,” एक नागरिक ने चेतावनी दी। सुप्रीम कोर्ट की हालिया सुनवाई में भी केंद्र और राज्यों से आवारा कुत्तों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाने को कहा गया है। बलिया प्रशासन को शासन स्तर से निर्देश मिल चुके हैं, लेकिन धरातल पर अमल न होने से समस्या बरकरार है।







