बलिया, 1 मार्च 2026 – उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का एक दुखद मामला सामने आया है। जिला महिला अस्पताल में प्रसव पीड़ा से तड़पती गर्भवती नेहा गोंड (25) की मौत हो गई, और गर्भ में पल रहे बच्चे को भी नहीं बचाया जा सका। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने समय पर ध्यान नहीं दिया और नर्सों ने ताना तक मारा। घटना से दो घंटे तक इमरजेंसी सेवा बाधित रही, और मरीजों को परेशानी हुई। पुलिस ने मामला शांत कराया, लेकिन परिजनों ने पोस्टमॉर्टम से इंकार कर दिया। इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां लापरवाही से मौत के मामलों में वृद्धि हो रही है।
घटना का पूरा विवरण: सुबह भर्ती, दो घंटे बाद मौत
सहतवार थाना क्षेत्र के हसनपुरा विषैली गांव निवासी पप्पू गोंड की पत्नी नेहा गोंड को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने बेहतर इलाज की उम्मीद में जिला महिला अस्पताल में सुबह 6 बजे भर्ती कराया। देवर डब्लू गोंड ने बताया कि भर्ती होने के कुछ देर बाद प्रसव पीड़ा तेज हो गई। नर्स को जानकारी देने पर चेकअप करने की जगह उल्टे ताना देने लगीं। नर्स ने कहा, “यहां मुंह उठाकर चले आते हो।”
परिजनों का आरोप है कि नेहा दर्द से कराहती रहीं और बेहोश हो गईं। जब दूसरे अस्पताल ले जाने लगे तो नर्सों ने रोक कर प्रसव कक्ष में ले जाकर चेक किया। लेकिन दो घंटे बाद उनकी मौत हो गई। ढाई घंटे भर्ती रहने के दौरान परिजनों के बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई महिला चिकित्सक जांच करने तक नहीं पहुंची। नेहा पिछले पांच-छह महीने से अस्पताल में चेकअप कराती थीं, और हर रिपोर्ट सही थी। परिवार वाले खुश थे कि नया मेहमान आने वाला है, लेकिन लापरवाही ने सब बर्बाद कर दिया।
परिजनों का आरोप: स्टाफ का व्यवहार खराब, लापरवाही से मौत
देवर डब्लू गोंड ने कहा कि अस्पताल में कर्मचारियों का व्यवहार मरीजों और तीमारदारों के प्रति बेहद खराब है। अगर समय पर चिकित्सक द्वारा चेकअप किया गया होता तो ऑपरेशन या प्रसव से मौत नहीं होती। परिजनों ने चिकित्सक व नर्स पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया, जिससे दो घंटे तक इमरजेंसी सेवा बाधित रही। मरीज व तीमारदार परेशान रहे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत करवाया। परिजनों ने पोस्टमॉर्टम कराने से इंकार किया, हालांकि पुलिस ने शव वाहन मंगाकर शव घर भेजवाया। घर की महिलाओं का रोते-रोते बुरा हाल रहा।
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परिजनों ने प्रशासन से स्टाफ पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में समय पर ध्यान दिया जाता तो नेहा और बच्चा बच जाता।
पुलिस और अस्पताल की प्रतिक्रिया: जांच का दावा, लेकिन कोई आधिकारिक बयान नहीं
घटना की सूचना पर पुलिस पहुंची और हंगामा शांत कराया। अस्पताल प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि लापरवाही की शिकायत पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। जिला महिला अस्पताल में पहले भी लापरवाही के आरोप लग चुके हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।









