8 अक्टूबर 2025 को फेसबुक पर एक व्यक्ति ने जाति, धर्म और संप्रदाय के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की। यह टिप्पणी इतनी घिनौनी और भड़काऊ थी कि इसे देखकर समाज के विभिन्न वर्गों में आक्रोश फैल गया। खासकर, क्षेत्रीय समुदायों में इससे नाराज होकर लोगों ने पुलिस से कारवाई की मांग की लेकिन 1 हफ्ते से ज्यादा बीत जाने के बाद भी पुलिस ने कोई कारवाई नहीं की।
शिकायतकर्ता का कहना
वही शिकायतकर्ता का कहना है की यह स्थिति न केवल मुझे, बल्कि मेरे समुदाय के कई अन्य लोगों को भी चिंता में डाल चुकी है। यह घटना पहले से ही एक संवेदनशील मामला है, और कार्रवाई में देरी से यह संदेश जा रहा है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की नफरत फैलाना अब बिना किसी सजा के किया जा सकता है।
अगर पुलिस और प्रशासन इस तरह के मामलों में सही समय पर कार्रवाई नहीं करेंगे, तो यह समाज में और भी ज्यादा असहमति और तनाव पैदा कर सकता है। हम सभी जानते हैं कि जाति और धर्म के नाम पर हो रही हिंसा, नफरत और विभाजन से समाज में स्थायी घाव हो सकते हैं। इसलिए, यह जरूरी है कि इस तरह की घटनाओं को सख्ती से रोका जाए और दोषियों को दंडित किया जाए।
पुलिस का जवाब:
पुलिस की ओर से इस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी या कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे शिकायतकर्ता और उनके समुदाय के लोगों में गहरी चिंता और आक्रोश है। पंडित नीरज गोस्वामी का कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत अपमान का नहीं, बल्कि एक सामाजिक समस्या का संकेत है। “जब तक पुलिस इस मामले में सख्त कदम नहीं उठाती, ऐसे अपराधियों को बढ़ावा मिलेगा और समाज में असहमति, घृणा और तनाव बढ़ेगा,” उन्होंने कहा।
सामाजिक चिंता:
सोशल मीडिया पर इस तरह की अभद्र टिप्पणियाँ करने से समाज में नफरत और तनाव फैलता है, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। शिकायतकर्ता का कहना है, “यह केवल मेरे समुदाय के लिए नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।” उनका मानना है कि पुलिस और प्रशासन की ओर से इस मामले में समय पर कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह गलत संदेश जा रहा है कि सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले अपराधी सुरक्षित हैं।