बलिया जिले का ऐतिहासिक ददरी मेला, जो हर वर्ष उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में एक विशेष ध्यान खिचता है , इस बार कई नई विशेषताओं और सुविधाओं के साथ आयोजित किया जाएगा। इस मेले की अहमियत न केवल धार्मिक दृष्टि से है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर, परंपरा, और समृद्धि का प्रतीक भी है। मेला प्रभारी और मुख्य राजस्व अधिकारी त्रिभुवन ने बताया कि इस वर्ष मेला क्षेत्र में कुछ बड़े बदलाव किए जा रहे हैं और तैयारियां तेजी से चल रही हैं। मेला आयोजन के दौरान बलिया की ऐतिहासिक धरोहर, आस्था और राष्ट्रीयता को प्रमुखता से दर्शाने का प्रयास किया जाएगा।
ददरी मेल मे नई विशेषताएं और प्रमुख स्थल
इस बार मेला क्षेत्र में बनाए गए चौराहों की योजना में बलिया की ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक आस्थाओं को दर्शाया जाएगा। महर्षि भृगु, दर्दर मुनि, मां दुर्गा, श्री गणेश, शहीद चौक और सूरजताल जैसे प्रमुख चौराहे बलिया के इतिहास और संस्कृति को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इन चौराहों पर स्थापित की जाने वाली मूर्तियां और कलात्मक डिज़ाइन, बलिया के सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का प्रयास करेंगी। इन चौराहों को विशेष रूप से सजाया जाएगा ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बलिया के ऐतिहासिक महत्व का एहसास हो सके।
इसके अलावा, भारतेंदु मंच की स्थापना पहले की तरह मेला क्षेत्र में की जाएगी। इस मंच पर शास्त्रीय संगीत, लोक नृत्य, और अन्य सांस्कृतिक विधाओं का आयोजन होगा, जिससे मेले में आने वाले लोग भारतीय संस्कृति की विविधता का आनंद ले सकेंगे। यहां कलाकारों के प्रदर्शन के माध्यम से हमारी पारंपरिक कला और संस्कृति को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी। शास्त्रीय संगीत और लोक कला की इस अनूठी प्रस्तुति से मेले में आने वाले लोग एक नई सांस्कृतिक अनुभव का हिस्सा बनेंगे।
सरकारी योजनाओं का प्रचार और प्रदर्शनियां
इस बार मेला क्षेत्र में विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा कई प्रदर्शनियां भी आयोजित की जाएंगी। कृषि, समाज कल्याण, पंचायत राज और अन्य विभागों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का प्रचार किया जाएगा ताकि मेले में आने वाले लोग विभिन्न योजनाओं से जुड़ सकें। इन प्रदर्शनियों में किसानों के लिए कृषि योजनाओं, समाज कल्याण योजनाओं, और पंचायत राज से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। यह पहल आम जनता को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से की जा रही है।
इसके अलावा, मेला क्षेत्र में विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे, जहां लोग विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। यह योजनाएं खासतौर पर गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई हैं। लोगों को इन योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे इन योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठा सकें।
मेले की व्यवस्था और सुविधाएं
मेले में इस बार कई नई सुविधाओं और व्यवस्थाओं की घोषणा की गई है। सबसे अहम बदलाव यह है कि मेला क्षेत्र में 70 फीट चौड़े रास्ते बनाए जाएंगे, जिससे जाम की समस्या नहीं होगी और आने-जाने में आसानी होगी। इन रास्तों के मध्य में 6×6 फीट की जगह आरक्षित की जाएगी, जहां 2000 से अधिक फुटकर व्यापारी अपनी दुकानें लगा सकेंगे। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार लगभग 700 दुकानें लगाई जाएंगी, जो कि व्यापारियों के लिए बड़ी राहत होगी। पिछले साल की तुलना में इस बार अतिरिक्त पंक्ति जोड़ी गई है ताकि अधिक से अधिक दुकानदार अपनी दुकानों को स्थापित कर सकें।
व्यापारियों के लिए एक और राहत की खबर यह है कि उन्हें प्रति लठ्ठा 10 वाट मुफ्त बिजली दी जाएगी। इस कदम से व्यापारियों को अपनी दुकानों में बिजली की कोई समस्या नहीं होगी और वे अपने व्यापार को सुचारू रूप से चला सकेंगे। इसके साथ ही, व्यापारियों के लिए एक शिकायत प्रकोष्ठ भी बनाया गया है, जिससे उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके। अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) के नेतृत्व में इस प्रकोष्ठ का संचालन किया जाएगा, जिसमें दो डिप्टी कलेक्टर भी शामिल होंगे। इसके माध्यम से व्यापारियों को उनकी समस्याओं के बारे में सीधे अधिकारियों से संवाद करने का अवसर मिलेगा।
सुविधाओं और सुरक्षा का खास ध्यान
मेले की व्यवस्था में विशेष ध्यान दिया गया है कि सुरक्षा के सभी पहलुओं को सुनिश्चित किया जाए। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से तैनात रहेगा। इसके अतिरिक्त, मेला क्षेत्र में प्रवेश और निकासी के लिए चार पार्किंग स्थलों का प्रबंध किया गया है, जिनका ठेका एआरटीओ के सहयोग से व्यवस्थित किया जाएगा। इस कदम से यातायात की व्यवस्था सुचारू रूप से चल सकेगी और वाहन पार्किंग की समस्या का समाधान हो सकेगा।
जुताई और स्वच्छता कार्य
मेला क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखना भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। इसके लिए जुताई का कार्य तेजी से चल रहा है और अगले तीन दिनों में इसका स्वरूप स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगेगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मेले के दौरान क्षेत्र में कोई गंदगी न हो और सभी स्थानों पर सफाई बनी रहे। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को स्वच्छ वातावरण प्रदान करने के लिए यह कदम उठाए गए हैं।








