बलिया जिले के बहुचर्चित नरही वसूली कांड में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। जिले में ट्रक चालकों से अवैध वसूली के आरोपों में घिरे लगभग सभी पुलिसकर्मियों को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद बहाल कर दिया गया है। शासन के निर्देश पर बहाल किए गए इन सभी पुलिसकर्मियों का बलिया जिले से बाहर स्थानांतरण कर दिया गया है। खास बात यह है कि आरोपों से घिरे इन दागी पुलिसकर्मियों को किसी न किसी विभागीय प्रकोष्ठ या विशेष इकाई में तैनाती दी गई है, ताकि वे जिले की कानून-व्यवस्था से सीधे तौर पर न जुड़े रहें।
यह मामला जिले की छवि को लंबे समय तक प्रभावित करने वाला रहा है। नरही वसूली कांड के उजागर होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था और कई पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी थी। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इन पुलिसकर्मियों की बहाली ने एक बार फिर इस प्रकरण को चर्चा में ला दिया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई बहाली
बलिया के पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी पुलिसकर्मियों को हाईकोर्ट से राहत मिली है, जिसके बाद शासन के स्तर से उन्हें बहाल करने का आदेश जारी किया गया। एसपी के अनुसार, बहाल किए गए सभी पुलिसकर्मियों को जिले से बाहर स्थानांतरित किया गया है, ताकि निष्पक्ष जांच प्रभावित न हो।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच अभी भी जारी है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इन्हें प्रशासनिक या तकनीकी प्रकोष्ठों में तैनात किया गया है।
कहां-कहां हुई तैनाती
नरही वसूली कांड में आरोपी रहे पुलिसकर्मियों की तैनाती इस प्रकार की गई है—
- तत्कालीन एसओ नरही पन्नेलाल और उनके नायब एसआई मंगला प्रसाद उपाध्याय को फिंगर प्रिंट ब्यूरो, लखनऊ भेजा गया है।
- तत्कालीन चौकी प्रभारी कोरंटाडीह एसआई राजेश कुमार प्रभाकर को राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (SCRB), लखनऊ में तैनाती दी गई है।
- मुख्य आरक्षी चंद्रजीत यादव, कांस्टेबल प्रशांत सिंह, सतीश चंद्र गुप्ता और बलराम सिंह को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW), लखनऊ में तैनात किया गया है।
- मुख्य आरक्षी जयप्रकाश यादव, दुर्गादत्त राय, कांस्टेबल ओमप्रकाश और हरिदयाल सिंह को वीमेन पावर लाइन, लखनऊ भेजा गया है।
- मुख्य आरक्षी औरंगजेब खां को पुलिस महानिदेशक मुख्यालय, लखनऊ में तैनाती दी गई है।
- विष्णु, कांस्टेबल दीपक कुमार मिश्र, परविंद्र यादव और उदयवीर को अपराध अनुसंधान विभाग, लखनऊ में भेजा गया है।
इन सभी तैनातियों को देखकर साफ है कि शासन ने जानबूझकर इन्हें ऐसे प्रकोष्ठों में भेजा है, जहां इनका आम जनता से सीधा संपर्क न हो।
क्या था नरही वसूली कांड
नरही वसूली कांड बलिया जिले के भरौली तिराहा, जो कि बलिया-बक्सर (बिहार) सीमा पर स्थित है, से जुड़ा हुआ है। यह इलाका भारी वाहनों, खासकर ट्रकों की आवाजाही के लिए जाना जाता है। इसी स्थान पर पुलिस चौकी कोरंटाडीह स्थित है।
आरोप था कि यहां तैनात पुलिसकर्मी दलालों के साथ मिलकर ट्रक चालकों से अवैध वसूली कर रहे थे। ट्रकों से एंट्री के नाम पर पैसे लिए जाते थे और जो चालक पैसा देने से मना करता था, उसे परेशान किया जाता था।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब वाराणसी जोन के अपर पुलिस महानिदेशक पीयूष मोडिया और आजमगढ़ के तत्कालीन पुलिस उपमहानिरीक्षक वैभव कृष्ण ने सादे कपड़ों में छापा मारा। अचानक हुई इस कार्रवाई में पुलिसकर्मियों और दलालों की मिलीभगत उजागर हो गई।
छापेमारी से मचा था हड़कंप
वरिष्ठ अधिकारियों की इस गुप्त छापेमारी से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। मौके पर कई गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं। इसके बाद तत्काल प्रभाव से कई पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए गए थे।
यह मामला सिर्फ बलिया ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया था। पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे और ट्रक चालकों से अवैध वसूली की शिकायतों को बल मिला था।
शासन और पुलिस की सख्त कार्रवाई
मामले के सामने आने के बाद शासन स्तर पर सख्त रुख अपनाया गया था। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन, जांच और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि बाद में इन पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें कुछ मामलों में राहत मिली।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में शासन को इन पुलिसकर्मियों की बहाली करनी पड़ी, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित किया गया कि इन्हें जिले से बाहर रखा जाए।
एसपी बलिया का बयान
इस पूरे मामले पर एसपी ओमवीर सिंह ने कहा—
“हाईकोर्ट के आदेशों के बाद आरोपी पुलिसकर्मियों को बहाल किया गया है। शासन के निर्देश पर सभी को जिले से बाहर स्थानांतरित किया गया है। इनके खिलाफ जांच जारी है और जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”








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