मऊ जिले के शहर कोतवाली में एक हत्याकांड के मुख्य आरोपी रॉबिन सिंह ने आखिरकार आत्मसमर्पण कर दिया है। इस हत्याकांड को लेकर पुलिस ने रॉबिन सिंह पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। 13 दिसंबर को बलिया जिले के उभांव थाना क्षेत्र में राहुल यादव उर्फ आयुष की हत्या कर दी गई थी, और इसके बाद से रॉबिन सिंह पुलिस के लिए एक वांछित अपराधी था। हालांकि, उसने आत्मसमर्पण के बाद दावा किया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया जा रहा है और उसके पास इस बात के सबूत भी हैं।
रॉबिन सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन द्वारा उसे लगातार परेशान किया जा रहा था, जिसके कारण वह अंततः आत्मसमर्पण करने पर मजबूर हुआ। उसने यह दावा किया कि यह मामला पूरी तरह से झूठा है और उसे और उसके परिवार को पुलिस के दबाव में लाया गया है।
राहुल यादव हत्याकांड: घटना का विवरण
13 दिसंबर को बलिया जिले के उभांव थाना क्षेत्र के रहने वाले राहुल यादव उर्फ आयुष की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राहुल यादव के परिवार का कहना था कि यह हत्या व्यक्तिगत रंजिश के चलते की गई थी। शुरुआत में पुलिस ने हत्या की वजह को स्पष्ट नहीं किया था, लेकिन बाद में यह मामला कई आरोपियों तक पहुंच गया।
इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी रॉबिन सिंह के अलावा, उसके अन्य सहयोगी रोहित, राज और पवन सिंह भी मुख्य संदिग्धों में थे। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज किया और इनकी तलाश शुरू कर दी। रॉबिन सिंह के आत्मसमर्पण के बाद, पुलिस ने उसकी और उसके सहयोगियों की भूमिका की जांच शुरू की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनकी involvement कितनी गहरी है।
हत्याकांड में एक महिला सहित छह अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। हालांकि, रॉबिन सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी थी। पुलिस का कहना था कि इस हत्याकांड में उसका और उसके सहयोगियों का सीधा हाथ है, और उनकी गिरफ्तारी से मामले का पर्दाफाश किया जाएगा।
रॉबिन सिंह का आत्मसमर्पण और उसका बयान
रॉबिन सिंह ने पुलिस प्रशासन द्वारा की जा रही परेशानियों का जिक्र करते हुए यह कहा कि वह दबाव में आकर आत्मसमर्पण करने को मजबूर हुआ। उसने यह भी कहा कि उसने अपनी बेगुनाही को साबित करने के लिए अपनी हाजिरी दर्ज कराई है। रॉबिन सिंह के अनुसार, उसे यह मामला पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत लगता है, और उसके पास इसके खिलाफ सबूत भी हैं।
उसने यह स्पष्ट किया कि वह पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने से पहले, बड़े अधिकारियों से मदद लेकर इस निर्णय पर पहुंचा था। इसके बाद, रॉबिन सिंह ने मऊ शहर कोतवाली में हाजिरी दी और पुलिस से यह आग्रह किया कि वह उसकी स्थिति की जांच करें। यदि उसे किसी भी अपराध में दोषी पाया जाता है, तो वह पूरी तरह से सजा भुगतने के लिए तैयार है।
समीर उर्फ मंटू पर जानलेवा हमला: एक और गंभीर आरोप
रॉबिन सिंह और उसके सहयोगियों पर एक और गंभीर आरोप भी है। यह आरोप मऊ जिले के रामपुर थाना क्षेत्र में 25 नवंबर को समीर उर्फ मंटू पर जानलेवा हमले का है। समीर कुमार को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था और इलाज के लिए लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल में भर्ती किया गया था। वहां इलाज के दौरान, 18 दिसंबर को समीर कुमार की मौत हो गई।
यह घटना रॉबिन सिंह और उसके सहयोगियों के खिलाफ एक और महत्वपूर्ण मामले के रूप में उभरी है। पुलिस ने इसे लेकर भी जांच शुरू कर दी है और कहा है कि यह जानलेवा हमला हत्या का रूप ले सकता है। अब इस मामले में भी रॉबिन सिंह और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।
समीर उर्फ मंटू पर हमले के बाद, उसके परिवारवालों ने आरोप लगाया था कि यह हमला रॉबिन सिंह और उसके सहयोगियों के साथ पुराने विवाद के कारण किया गया। यह विवाद अब एक और हत्या के मामले में बदल गया, और पुलिस को यह केस भी जांचने की आवश्यकता थी।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की स्थिति
रॉबिन सिंह के आत्मसमर्पण के बाद, पुलिस अब इन दोनों मामलों पर गंभीरता से जांच कर रही है। पुलिस ने कहा है कि अगर रॉबिन सिंह और उसके सहयोगी दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी।
पुलिस ने रॉबिन सिंह के खिलाफ 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, और अब उसकी गिरफ्तारी के बाद, यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह आत्मसमर्पण सच्चाई की ओर बढ़ने की कोशिश है या फिर केवल पुलिस से बचने के लिए एक चालाकी।
बलिया न्यूज के साथ अभिषेक











