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बलिया के इंदरपुर में अवैध अस्पतालों के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई: जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में जाँच जारी

October 25, 2025 4:50 PM
इंदरपुर में अवैध अस्पतालों के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई: जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में जाँच जारी
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बलिया इंदरपुर। नगरा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन द्वारा अवैध अस्पतालों के खिलाफ हालिया निरीक्षण अभियान ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एससीएमओ डॉ. पद्मावती गौतम और प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने इन अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया, जिसमे तीन बिना लाइसेंस चिकित्सालयों के खिलाफ कार्रवाई की गई। हैरान करने वाली बात यह है कि इन तीन अस्पतालों में से एक सरकारी डॉक्टर का भी अस्पताल शामिल था, जिसे बिना पंजीकरण के चलाया जा रहा था। यह कार्रवाई उस समय की गई जब स्थानीय मीडिया में एक जच्चा-बच्चा की मौत के मामले ने प्रशासन को चेतावनी दी थी, जिसके बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए।

अवैध अस्पतालों की ताबड़तोड़ जांच

शुक्रवार को अमर उजाला ने नगरा में अवैध अस्पतालों की गंभीर स्थिति को उजागर किया। इस खबर के अनुसार, नगरा क्षेत्र में चल रहे अस्पतालों की संख्या 400 से अधिक बताई गई है, जबकि केवल 100 अस्पताल पंजीकृत हैं। इसके अलावा, अवैध अस्पतालों में काम करने वाले ज्यादातर चिकित्सक बिना लाइसेंस के ही इलाज कर रहे हैं। इन अस्पतालों के कारण न केवल स्थानीय लोगों की जान को खतरा था, बल्कि कई महिलाओं और बच्चों की जान भी जा चुकी थी।

एससीएमओ डॉ. पद्मावती गौतम और प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने इस संदर्भ में त्वरित कार्रवाई की। नगरा क्षेत्र के तीन प्रमुख अवैध अस्पतालों की जांच की गई, और इनमें से एक सरकारी डॉक्टर के अस्पताल को भी पंजीकरण की अनुपस्थिति के कारण नोटिस दिया गया। इसके अलावा, मालीपुर में निरीक्षण के दौरान एसीएमओ ने यह पाया कि एक सरकारी चिकित्सक बगैर पंजीकरण के अपना अस्पताल चला रहा था। डॉ. अमित यादव को तत्काल नोटिस जारी कर अस्पताल बंद करने का आदेश दिया गया।

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सभी निरीक्षणों के दौरान, अधिकांश अवैध अस्पतालों के संचालक ताला लगाकर फरार हो गए थे। ऐसे अस्पतालों के संचालकों को ढूंढने और उन पर कार्रवाई करने के लिए विभाग ने कड़े निर्देश दिए हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी हालत में अवैध अस्पतालों को चलने नहीं दिया जाएगा और यह निरीक्षण अभियान लगातार चलता रहेगा।

जच्चा-बच्चा की मौत का मामला

नगरा क्षेत्र में एक और संवेदनशील मामला सामने आया जब एक महिला की प्रसव के दौरान मौत हो गई। घटना में जच्चा-बच्चा की मृत्यु एक अवैध क्लीनिक में ऑपरेशन के दौरान हुई। दीपावली के दिन, कसौंडर की महिला संगीता को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, और उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास स्थित एक अवैध क्लीनिक में भर्ती किया गया। इस क्लीनिक की संचालिका मंजू देवी थी, जो एक झोलाछाप महिला चिकित्सक थी।

रात के समय महिला का प्रसव हुआ, लेकिन प्लेसेंटा नहीं निकल पाया, जिससे महिला की हालत गंभीर हो गई। इसके बाद, मंजू देवी ने नगरा के ही किसी अन्य झोलाछाप चिकित्सक को बुलाया, जिसने ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद, महिला की हालत और बिगड़ गई और अंततः जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई।

मृत्यु के बाद, आरोपित महिला चिकित्सक मंजू देवी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। लेकिन, ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। चार दिन से स्वास्थ्य विभाग उस चिकित्सक को तलाश रहा है, लेकिन उसका पता नहीं चल पाया है। इस घटना ने क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है और लोगों के बीच गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

स्वास्थ्य विभाग का कदम

इस मामले में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने कहा कि ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक की तलाश की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके विभाग के अधिकारी इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रहे हैं और ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक को पकड़ने के लिए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। डॉ. राहुल सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के अवैध क्लीनिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में किसी और की जान खतरे में न पड़े।

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स्वास्थ्य विभाग ने अवैध अस्पतालों और चिकित्सकों के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है कि यदि किसी भी चिकित्सक के पास उचित पंजीकरण नहीं होगा, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, विभाग ने यह सुनिश्चित करने का भी वादा किया है कि सभी पंजीकरण प्रक्रिया सही तरीके से पूरी की जाए, और बिना पंजीकरण वाले अस्पतालों को तुरंत बंद किया जाएगा।

अवैध अस्पतालों का बढ़ता नेटवर्क

नगरा क्षेत्र में अवैध अस्पतालों का बढ़ता हुआ नेटवर्क न केवल स्वास्थ्य विभाग के लिए एक चुनौती है, बल्कि स्थानीय नागरिकों के लिए भी एक गंभीर समस्या बन चुका है। अवैध रूप से चलने वाले इन अस्पतालों में ज्यादातर झोलाछाप चिकित्सक होते हैं, जिनके पास न तो उचित मेडिकल शिक्षा होती है, न ही किसी तरह का लाइसेंस। फिर भी, ये अस्पताल चलाकर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

यहां तक कि सरकारी अस्पतालों में भी कुछ चिकित्सक बिना पंजीकरण के अस्पताल चला रहे हैं, जो इस क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। पंजीकरण के बिना अस्पताल चलाने से ना केवल गलत इलाज होता है, बल्कि ऑपरेशन के दौरान जोखिम भी काफी बढ़ जाता है।

रिपोर्ट: अनीश , (स्थानीय रिपोर्टर, Ballia)

Abhishek

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