उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 2025-26 के बजट में राज्य के चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। इस बजट में बलिया और बलरामपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की घोषणा की गई है, जिससे इन जिलों में उच्चतम चिकित्सा सुविधाओं और भी सही किया जाएगा । वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विधानसभा में आज बजट पेश करते हुए यह जानकारी दी और कहा कि इन दोनों मेडिकल कॉलेजों के निर्माण से ना केवल चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।
बलिया और बलरामपुर में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना
इस बजट में बलिया और बलरामपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। बलिया में बनने वाले मेडिकल कॉलेज के लिए 27 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है, जबकि बलरामपुर के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस कदम से इन क्षेत्रों में चिकित्सा शिक्षा को नया आयाम मिलेगा और यहां के विद्यार्थियों को राजधानी जैसे उच्च मानक की चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
इन नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से न केवल स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार होगा। इस समय में इन क्षेत्रों के नागरिकों को उपचार के लिए अन्य जगह जाना पड़ता है जैसे वाराणसी जैसे बड़े शहरों मे , लेकिन अब उन्हें उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं घर के पास ही उपलब्ध होंगी।
प्रदेश में चिकित्सा सीटों की संख्या भी बढ़ाया गया
उत्तर प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र में इस बजट के माध्यम से बड़ी उपलब्धि हासिल होने वाली है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों और विश्वविद्यालयों में कुल 11,800 एमबीबीएस सीटें और 3,971 पीजी सीटें उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, केंद्रीय बजट में 10,000 नई सीटों की घोषणा की गई थी, जिनमें से 1,500 सीटें उत्तर प्रदेश को मिलेंगी। इस नई व्यवस्था के तहत, राज्य में चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का विस्तार होगा और ज्यादा छात्रों को चिकित्सा क्षेत्र में अपने करियर को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा।
मेडिकल कॉलेजों की संख्या में बढ़ोतरी
उत्तर प्रदेश में अभी तक 2110 आयुर्वेदिक, 254 यूनानी और 1585 होम्योपैथिक चिकित्सालय चकते हैं। इसके अलावा, राज्य में 8 आयुर्वेदिक कॉलेज, 2 यूनानी कॉलेज और 9 होम्योपैथिक कॉलेज भी कार्यरत हैं। इन सभी सुविधाओं के साथ, अब राज्य सरकार ने प्राइवेट और सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने के लिए योजनाएं बनाई हैं। इसके लिए आगामी वर्षों में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की योजना है।
अयोध्या और वाराणसी में नए चिकित्सा कॉलेज
इस बजट में उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों को भी मेडिकल कॉलेजों का तोहफा मिला है। अयोध्या और वाराणसी में चिकित्सा संस्थानों के विस्तार के लिए ऐलान किया गया है। अयोध्या में एक राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है, जबकि वाराणसी में एक राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना की योजना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना से वहां के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी और इस क्षेत्र में चिकित्सा के लिए नई दिशा मिलेगी। वहीं, अयोध्या में आयुर्वेदिक महाविद्यालय का निर्माण होने से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी बढ़ावा मिलेगा और आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में अयोध्या को एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा।
गोरखपुर में आयुष विश्वविद्यालय का निर्माण
इसके अलावा, गोरखपुर में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य को भी पूरा किया जाएगा। यह विश्वविद्यालय आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी) चिकित्सा पद्धतियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। इससे राज्य में आयुष चिकित्सा का दायरा बढ़ेगा और चिकित्सा के पारंपरिक तरीकों को नया मानक मिलेगा।
चिकित्सा सेवाओं में सुधार की दिशा में बड़ा कदम
यूपी सरकार का यह कदम चिकित्सा क्षेत्र में सुधार और विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से न केवल राज्य में चिकित्सा शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी मिल सकेगा।








